यात्रा मार्गदर्शन
श्री काल भैरव मंदिर, भैरवगढ़, उज्जैन, मध्य प्रदेश, भारत
- सुबह 6:30 पट खुलते हैं
- सुबह 8:00 प्रातः आरती
- रात 8:30 संध्या आरती
- रात 9:30 पट बंद होते हैं
- आने का उत्तम समय
- अक्टूबर से मार्च का मौसम सबसे सुखद रहता है। सप्ताह के सामान्य दिनों में सुबह जल्दी आने पर भीड़ सबसे कम मिलती है; रविवार, छुट्टियों और पर्वों पर बहुत भीड़ रहती है।
- कितना समय रखें
- सामान्य दिन में लगभग 30 से 60 मिनट; शनिवार-रविवार और पर्वों पर काफ़ी अधिक समय रखें।
- प्रवेश शुल्क
- सामान्य दर्शन निःशुल्क है। मई 2026 में मंदिर समिति ने 500 रुपये का सशुल्क शीघ्र (वीआईपी) दर्शन टिकट शुरू किया, जो मंदिर परिसर के अधिकृत काउंटरों पर मिलता है।
- वेशभूषा
- कोई निर्धारित वेशभूषा नहीं है। कंधे और घुटने ढकने वाले शालीन वस्त्र उचित हैं और जूते-चप्पल मंदिर के बाहर उतारने होते हैं।
- फोटोग्राफी
- बाहरी आँगन और प्रवेश द्वार पर सामान्यतः फोटो लिए जा सकते हैं। गर्भगृह के भीतर फोटोग्राफी पर रोक बताई जाती है, इसलिए मंदिर कर्मचारियों के निर्देशों का पालन करें।
कैसे पहुँचें
- शहर के भीतर
- मंदिर महाकालेश्वर मंदिर से लगभग 6 किमी दूर है; ऑटो, ई-रिक्शा या टैक्सी से 15 से 20 मिनट लगते हैं। कई श्रद्धालु शहर के इस ओर के मंदिरों के संयुक्त दर्शन के लिए एक ही वाहन किराये पर ले लेते हैं।
- रेल से
- पश्चिम रेलवे का उज्जैन जंक्शन (UJN) निकटतम स्टेशन है, जो मंदिर से लगभग 7 किमी दूर है और यहाँ से अधिकांश बड़े शहरों के लिए ट्रेनें मिलती हैं। स्टेशन के बाहर ऑटो, ई-रिक्शा और टैक्सी मिल जाते हैं।
- सड़क से
- उज्जैन सड़क मार्ग से इंदौर (लगभग 53 किमी) और भोपाल (लगभग 183 किमी) से जुड़ा है। इंदौर, भोपाल, रतलाम और ग्वालियर से नियमित बसें मिलती हैं। शहर से भैरवगढ़ मार्ग होकर मंदिर पहुँचा जाता है।
- हवाई मार्ग से
- निकटतम हवाई अड्डा इंदौर का देवी अहिल्याबाई होलकर हवाई अड्डा है। इंदौर से उज्जैन लगभग 53 से 55 किमी है और हवाई अड्डे से मंदिर तक सड़क मार्ग से लगभग 65 किमी पड़ता है। इंदौर और उज्जैन के बीच टैक्सी और बसें चलती हैं।
दर्शनार्थियों के लिए सुझाव
- छोटी कतार के लिए सप्ताह के सामान्य दिन सुबह जल्दी आएँ। रविवार और पर्वों पर लंबा इंतज़ार हो सकता है।
- मदिरा चढ़ाना ऐच्छिक है। फूल, नारियल, अगरबत्ती और मिठाई अपने आप में पूर्ण अर्पण हैं।
- उज्जैन शहर में अब शराब नहीं बिकती। जो श्रद्धालु मदिरा चढ़ाना चाहते हैं उन्हें नगर निगम सीमा के बाहर से वैध रूप से ख़रीदी हुई मदिरा लानी होगी और आबकारी नियमों में तय मात्रा के भीतर ही रखनी होगी।
- अपना अर्पण पुजारी को सौंपें। भोग केवल पुजारी ही लगाते हैं और श्रद्धालुओं को विग्रह छूने की अनुमति नहीं है।
- दर्शन टिकट केवल परिसर के अधिकृत काउंटर से ही लें। प्रशासन ने जल्दी दर्शन कराने का झाँसा देने वालों से सावधान रहने को कहा है।
- परिसर में लंगूर और बंदर घूमते रहते हैं। प्रसाद, खाने की चीज़ें और खुला सामान ढककर रखें।
- काल भैरव के साथ सिद्धवट, गढ़कालिका, भर्तृहरि गुफा, मंगलनाथ और सांदीपनि आश्रम का कार्यक्रम एक साथ बनाएँ। ये सभी शहर के उत्तरी हिस्से में हैं और प्रायः एक ही ऑटो या टैक्सी फेरे में हो जाते हैं।
आसपास के दर्शनीय स्थल
- 2 किमी
सिद्धवट
शिप्रा तट का पवित्र वट वृक्ष, जहाँ पितरों के निमित्त कर्म किए जाते हैं। काल भैरव की सवारी यहाँ तक आती है।
- 2.5 किमी
गढ़कालिका मंदिर
देवी कालिका का प्राचीन मंदिर; परंपरा के अनुसार महाकवि कालिदास की आराध्य देवी।
- 2.5 किमी
भर्तृहरि गुफा
शिप्रा के पास की गुफाएँ, जो राजा भर्तृहरि से जुड़ी हैं; कहा जाता है कि उन्होंने यहाँ तपस्या की थी।
- 3 किमी
मंगलनाथ मंदिर
शिप्रा तट का शिव मंदिर, जिसे परंपरा में मंगल ग्रह का जन्मस्थान माना जाता है। मंगलवार का विशेष महत्व है।
- 3.5 किमी
सांदीपनि आश्रम
वह आश्रम जहाँ परंपरा के अनुसार श्रीकृष्ण, बलराम और सुदामा ने गुरु सांदीपनि से शिक्षा पाई।
- 4.5 किमी
कालियादेह महल
शिप्रा तट पर, भैरवगढ़ के उत्तर में स्थित 15वीं सदी का महल।
- 6 किमी
श्री महाकालेश्वर मंदिर
बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक और उज्जैन का प्रधान मंदिर। काल भैरव इन्हीं के सेनापति माने जाते हैं।
- 6 किमी
हरसिद्धि मंदिर
महाकालेश्वर के निकट देवी का प्रसिद्ध मंदिर, जो पर्वों की रात जगमगाने वाले अपने दो ऊँचे दीपस्तंभों के लिए जाना जाता है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
काल भैरव मंदिर में दर्शन का समय क्या है?
मई 2026 की रिपोर्ट के अनुसार मंदिर प्रतिदिन सुबह 6:30 बजे खुलता है और रात 9:30 बजे बंद होता है। पर्व और सवारी के दिनों में समय बदल सकता है, इसलिए समय कम हो तो स्थानीय स्तर पर पुष्टि कर लें।
आरती कब होती है?
आरती सुबह और शाम को होती है। मई 2026 की एक रिपोर्ट में समय सुबह 8:00 बजे और रात 8:30 बजे बताया गया है, जबकि कई यात्रा वेबसाइटें सुबह 7 से 8 और शाम 6 से 7 बजे बताती हैं। कृपया उसी दिन मंदिर में पूछ लें।
काल भैरव को मदिरा क्यों चढ़ाई जाती है?
यह प्रथा तांत्रिक उपासना से आई है, जिसमें मद्य पंचमकार कहे जाने वाले पाँच अर्पणों में से एक है। भैरव की पूजा इसी परंपरा में होती है और इस मंदिर में मदिरा का भोग आज भी चलता है, जबकि शेष चार का पालन केवल प्रतीक रूप में होता है।
क्या मदिरा चढ़ाना अनिवार्य है?
नहीं, यह पूरी तरह ऐच्छिक है। बहुत से श्रद्धालु केवल फूल, नारियल, अगरबत्ती, लड्डू या चना-चिरौंजी चढ़ाते हैं और उन्हें भी वही दर्शन मिलते हैं।
उज्जैन में शराबबंदी के बाद क्या अब भी मदिरा चढ़ाई जा सकती है?
हाँ। 1 अप्रैल 2025 से उज्जैन नगर निगम सीमा में शराब की बिक्री बंद है और मंदिर के बाहर के काउंटर भी बंद कर दिए गए, पर भोग की परंपरा जारी रखी गई है। जो श्रद्धालु मदिरा चढ़ाना चाहते हैं वे उसे नगर निगम सीमा के बाहर से लाते हैं, और नित्य पूजा के लिए मदिरा की व्यवस्था मंदिर की ओर से होती है।
क्या प्रवेश शुल्क या वीआईपी दर्शन की व्यवस्था है?
सामान्य कतार से दर्शन निःशुल्क है। मई 2026 में मंदिर समिति ने 500 रुपये का सशुल्क दर्शन टिकट शुरू किया, जो परिसर के अधिकृत काउंटरों पर मिलता है और जिससे जल्दी दर्शन हो जाते हैं। बताया गया है कि आरती के समय यह सुविधा बंद रहती है।
काल भैरव मंदिर महाकालेश्वर और रेलवे स्टेशन से कितनी दूर है?
सड़क मार्ग से यह महाकालेश्वर मंदिर से लगभग 6 किमी और उज्जैन जंक्शन से लगभग 7 किमी दूर है। ट्रैफ़िक के अनुसार ऑटो या ई-रिक्शा से 15 से 25 मिनट लगते हैं।
काल भैरव को उज्जैन का कोतवाल क्यों कहा जाता है?
परंपरा में उन्हें वह रक्षक माना जाता है जो भगवान महाकाल की ओर से नगर की पहरेदारी करते हैं, ठीक वैसे ही जैसे पुराने समय में कोतवाल नगर की रखवाली करता था। इसी कारण श्रद्धालु अपनी महाकाल यात्रा को उनके दर्शन के बाद ही पूर्ण मानते हैं।
काल भैरव की सवारी कब निकलती है?
वर्ष में दो बार: भाद्रपद की डोल ग्यारस पर, जो प्रायः सितंबर में आती है, और मार्गशीर्ष में भैरव अष्टमी के अगले दिन, यानी नवंबर या दिसंबर में। सवारी लगभग शाम 4 बजे मंदिर से निकलती है।
मंदिर का प्रबंधन कौन करता है?
मंदिर का संचालन प्रबंध समिति करती है, जो उज्जैन ज़िला प्रशासन के अधीन काम करती है और मंदिर के लिए एक प्रशासक नियुक्त रहता है। पूजा-अर्चना परंपरागत पुजारी करते हैं।