काल भैरव मंदिर

उज्जैन के कोतवाल, महाकाल के सेनापति

6 am9 am12 pm3 pm6 pm9 pmप्रातः आरती, सुबह 8:00संध्या आरती, रात 8:30

आज का दर्शन-क्रम. समय भारतीय मानक समय में.

भैरवगढ़, उज्जैन स्थित काल भैरव का मुख्य मंदिर
भैरवगढ़, उज्जैन स्थित काल भैरव का मुख्य मंदिर

शिप्रा के तट पर भैरवगढ़ में विराजमान काल भैरव उज्जैन के रक्षक और नगर कोतवाल माने जाते हैं। स्कंद पुराण के अवंती खंड में इस तीर्थ का उल्लेख मिलता है और यहाँ भगवान को मदिरा का भोग लगाने की तांत्रिक परंपरा देशभर में प्रसिद्ध है। श्रद्धालुओं की मान्यता है कि महाकाल के दर्शन काल भैरव के दर्शन के बाद ही पूर्ण होते हैं।

आराध्य
काल भैरव, शिव का रौद्र रूप
मान्यता
उज्जैन के नगर कोतवाल और महाकाल के सेनापति
परंपरा
शैव एवं तांत्रिक; अष्ट भैरवों में प्रमुख
प्रसिद्धि
भगवान को मदिरा का भोग
शास्त्रीय उल्लेख
स्कंद पुराण का अवंती खंड
काल
प्राचीन स्थल, परमार काल (9वीं–13वीं सदी) के अवशेष; वर्तमान भवन मराठा कालीन, 18वीं सदी
स्थान
भैरवगढ़, शिप्रा तट, महाकालेश्वर से लगभग 6 किमी उत्तर
प्रमुख पर्व
भैरव अष्टमी (काल भैरव जयंती)
पूरा परिचय पढ़ें

दर्शन समय

दर्शन का समय

  • सामान्य दर्शनप्रतिदिन
    सुबह 6:30 से रात 9:30

    मई 2026 की रिपोर्ट के अनुसार मंदिर सुबह 6:30 बजे खुलता है और रात 9:30 बजे बंद होता है। कुछ अन्य स्रोत सुबह 6 से रात 10 बजे बताते हैं। पर्व और सवारी के दिनों में समय बदल सकता है।

आरती व नित्य क्रम

  • प्रातः आरतीप्रतिदिन
    सुबह 8:00 से सुबह 8:30

    आरंभ का समय मई 2026 की रिपोर्ट के अनुसार है; समाप्ति का समय अनुमानित है। कई यात्रा वेबसाइटें इसे सुबह 7 से 8 बजे बताती हैं।

  • संध्या आरतीप्रतिदिन
    रात 8:30 से रात 9:00

    आरंभ का समय मई 2026 की रिपोर्ट के अनुसार है; समाप्ति का समय अनुमानित है। कई यात्रा वेबसाइटें इसे शाम 6 से 7 बजे बताती हैं।

पर्व, ग्रहण और विशेष अवसरों पर समय बदल सकता है। यात्रा से पहले मंदिर में पुष्टि कर लें।

पूरा समय-क्रम देखें

पूजा व सेवा

ऑनलाइन केवल स्थान सुरक्षित होता है। दक्षिणा मंदिर के काउंटर पर ही दी जाती है, इस वेबसाइट पर कोई भुगतान नहीं लिया जाता।

  • मदिरा भोग

    यही वह अर्पण है जिसके लिए मंदिर प्रसिद्ध है। श्रद्धालु मदिरा पुजारी को सौंपते हैं, पुजारी उसे तश्तरी में डालकर मंत्रों के साथ भगवान के मुख से लगाते हैं और शेष प्रसाद के रूप में लौटा देते हैं। यह ऐच्छिक है और केवल पुजारी के माध्यम से ही होता है।

    • दक्षिणा की जानकारी मंदिर काउंटर पर
    इस पूजा के बारे में पूछें
  • नित्य भोग एवं आरती

    पुजारी दिनभर भगवान की नित्य पूजा करते हैं। मंदिर के पुजारियों के अनुसार दिन में पाँच बार पूजन के बाद भोग लगाया जाता है और सुबह तथा शाम को आरती होती है।

    • दक्षिणा की जानकारी मंदिर काउंटर पर
    इस पूजा के बारे में पूछें
  • पुष्प, नारियल एवं प्रसाद अर्पण

    सामान्य पूजन टोकरी में गेंदे के फूल, नारियल और अगरबत्ती होती है। श्रद्धालु लड्डू भी चढ़ाते हैं और शराबबंदी के बाद से कई भक्त चना, चिरौंजी और नारियल का प्रसाद लेकर आते हैं।

    • दक्षिणा की जानकारी मंदिर काउंटर पर
    इस पूजा के बारे में पूछें
सभी पूजा व सेवाएँ

वर्ष भर के पर्व

  • मार्गशीर्ष (अगहन) कृष्ण अष्टमी, नवंबर या दिसंबर

    भैरव अष्टमी (काल भैरव जयंती)

    काल भैरव का प्राकट्य दिवस और मंदिर का सबसे बड़ा पर्व। मंदिर फूलों से सजाया जाता है, मध्यरात्रि को जन्म आरती होती है और छप्पन भोग लगाया जाता है। अगले दिन भगवान की सवारी निकलती है।

  • फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी, फरवरी या मार्च

    महाशिवरात्रि

    शिव की इस महारात्रि पर उज्जैन में भारी भीड़ उमड़ती है और महाकाल के दर्शन को आए अधिकतर श्रद्धालु काल भैरव के दर्शन भी करते हैं। लंबी कतारों के लिए तैयार रहें।

  • बारह वर्ष में एक बार शिप्रा तट पर, चैत्र-वैशाख (अप्रैल-मई) में; अगला 2028 में प्रस्तावित

    सिंहस्थ कुंभ

    सिंहस्थ में लाखों श्रद्धालु और साधु-संत उज्जैन आते हैं और काल भैरव उन मंदिरों में है जहाँ वे दर्शन करने पहुँचते हैं। 2016 के सिंहस्थ में जब नगर में शराब की बिक्री रोकी गई थी, तब भी इस मंदिर में भोग की परंपरा जारी रखी गई थी।

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यात्रा मार्गदर्शन

श्री काल भैरव मंदिर, भैरवगढ़, उज्जैन, मध्य प्रदेश, भारत

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आने का उत्तम समय
अक्टूबर से मार्च का मौसम सबसे सुखद रहता है। सप्ताह के सामान्य दिनों में सुबह जल्दी आने पर भीड़ सबसे कम मिलती है; रविवार, छुट्टियों और पर्वों पर बहुत भीड़ रहती है।
कितना समय रखें
सामान्य दिन में लगभग 30 से 60 मिनट; शनिवार-रविवार और पर्वों पर काफ़ी अधिक समय रखें।
प्रवेश शुल्क
सामान्य दर्शन निःशुल्क है। मई 2026 में मंदिर समिति ने 500 रुपये का सशुल्क शीघ्र (वीआईपी) दर्शन टिकट शुरू किया, जो मंदिर परिसर के अधिकृत काउंटरों पर मिलता है।
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ऑनलाइन केवल स्थान सुरक्षित होता है। दक्षिणा मंदिर के काउंटर पर ही दी जाती है, इस वेबसाइट पर कोई भुगतान नहीं लिया जाता।