वर्ष भर के पर्व
पर्व, ग्रहण और विशेष अवसरों पर समय बदल सकता है। यात्रा से पहले मंदिर में पुष्टि कर लें।
- सुबह 6:30 पट खुलते हैं
- सुबह 8:00 प्रातः आरती
- रात 8:30 संध्या आरती
- रात 9:30 पट बंद होते हैं
- जनवरी
- फरवरीमहाशिवरात्रि
- मार्च
- अप्रैलसिंहस्थ कुंभ
- मई
- जून
- जुलाई
- अगस्तश्रावण मास
- सितंबरडोल ग्यारस की सवारी
- अक्टूबरयह माह
- नवंबरभैरव अष्टमी (काल भैरव जयंती)
- दिसंबर
- नवंबर
भैरव अष्टमी (काल भैरव जयंती)
मार्गशीर्ष (अगहन) कृष्ण अष्टमी, नवंबर या दिसंबर
काल भैरव का प्राकट्य दिवस और मंदिर का सबसे बड़ा पर्व। मंदिर फूलों से सजाया जाता है, मध्यरात्रि को जन्म आरती होती है और छप्पन भोग लगाया जाता है। अगले दिन भगवान की सवारी निकलती है।
- फरवरी
महाशिवरात्रि
फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी, फरवरी या मार्च
शिव की इस महारात्रि पर उज्जैन में भारी भीड़ उमड़ती है और महाकाल के दर्शन को आए अधिकतर श्रद्धालु काल भैरव के दर्शन भी करते हैं। लंबी कतारों के लिए तैयार रहें।
- अप्रैल
सिंहस्थ कुंभ
बारह वर्ष में एक बार शिप्रा तट पर, चैत्र-वैशाख (अप्रैल-मई) में; अगला 2028 में प्रस्तावित
सिंहस्थ में लाखों श्रद्धालु और साधु-संत उज्जैन आते हैं और काल भैरव उन मंदिरों में है जहाँ वे दर्शन करने पहुँचते हैं। 2016 के सिंहस्थ में जब नगर में शराब की बिक्री रोकी गई थी, तब भी इस मंदिर में भोग की परंपरा जारी रखी गई थी।
- अगस्त
श्रावण मास
श्रावण मास, जुलाई और अगस्त
श्रावण में, विशेषकर सोमवार को, उज्जैन शिवभक्तों और कांवड़ यात्रियों से भर जाता है। पूरे महीने काल भैरव मंदिर में श्रद्धालुओं का तांता लगा रहता है।
- सितंबर
डोल ग्यारस की सवारी
भाद्रपद शुक्ल एकादशी, प्रायः सितंबर
काल भैरव सिंधिया पगड़ी धारण कर पालकी में भैरवगढ़ का भ्रमण करते हैं। सवारी केंद्रीय जेल और सिद्धवट जाती है और पुलिस बल गार्ड ऑफ ऑनर देता है।